Valentine Day Special: इश्‍क की मिसाल कहे जाने वाले लैला-मजनू की कहानी पढ़कर भर आएगा आपका भी दिल

Valentine Day Special: इश्‍क की मिसाल कहे जाने वाले लैला-मजनू की कहानी पढ़कर भर आएगा आपका भी दिल

लैला-मजनू की कहानी 7वीं सदी की है जब अरब के रेगिस्तानों में अमीरों का बसेरा हुआ करता था.

Valentine Day Special: दुनिया में जब तक सच्‍चा प्यार जिन्दा रहेगा तब तक लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद जैसे अमर प्रेमियों का नाम याद किया जाएगा. आज की इस रिपोर्ट में हम आपको लैला मजनू (Laila Majnu) की सच्‍ची कहानी बता रहे हैं.

News18Hindi

Last Updated:
February 11, 2021, 4:39 PM IST

Valentine Day Special: जब तक दुनिया में सच्‍चा प्यार जिन्दा रहेगा तब तक लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट और शीरीं-फरहाद जैसे अमर प्रेमियों का नाम याद किया जाएगा. प्यार और त्‍याग के नाम पर इन जोड़ियों ने मिसाल कायम की और अपनी प्रेम कहानियों की वजह से ही आज तक लोगों के दिलों में जिंदा हैं. हालांकि प्‍यार के नाम पर इन्‍हें मंजिल तो नहीं मिली, लेकिन मिसालें अभी तक इन्‍हीं की दी जाती है. आज की इस रिपोर्ट में हम आपको लैला मजनू (Laila Majnu) की सच्‍ची कहानी बता रहे हैं.
ये है कहानी
लैला-मजनू की कहानी 7वीं सदी की है जब अरब के रेगिस्तानों में अमीरों का बसेरा हुआ करता था. अरब के शाह अमारी के बेटे कैस कैस इब्न आमरी यानी मजनू को देखते हीं ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि वह प्रेमी दीवानों की तरह दर-दर भटकता फिरेगा. ज्योतिषियों की भविष्यवाणी को झुठलाने के लिए शाह अमारी ने अपने बेटे को प्रेमरोग से महरूम रखने के लिए हर संभव प्रयास किये, लेकिन एक दिन कुदरत ने अपना खेल दिखा दिया.
नाज्द के शाह की बेटी लैला को मजनू ने दमिश्क के मदरसे में देखा और पहली नजर में हीं उसका आशिक हो गया. मौलवी ने उसे लाख समझाया कि वह उसे भूलकर पढ़ाई में अपना ध्यान लगाए. लेकिन तबतक मजनू दिवाना हो चुका था. मजनू की मोहब्बत का असर लैला पर भी हुआ और दोनों हीं सच्‍चे प्रेमियों की तरह प्रेम की अग्नि में कूद पड़े.इसे भी पढ़ें- Valentine Day Shayari: ‘वो ख़ुद गुलाब था उसको गुलाब क्या देता’
बताते हैं कि लैला एक सियाहफाम यानी काली लड़की थी और मजनू गोरा नौजवान. लोगों ने जब मजनू से पूछा कि तुमने काली लड़की में क्या देखकर उससे मोहब्बत की, इस पर मजनू ने कहा कि कुरान शरीफ के हर हर्फ काले रंग के अक्षर में ही लिखे गए हैं. जहां आशिक का दिल आता है वहां काले और गोरे का भेद नहीं आता. लैला को भी मजनू से प्यार हो गया था. लेकिन लैला के घर वालों को मजनू पसंद नहीं था. इसी वजह से लैला के घरवालों ने उसकी शादी बख्त नाम के इंसान से करा दी. लेकिन प्रेम दिवानी लैला ने अपने शौहर से बता दिया कि वह मजनू के अलावा किसी और की नहीं हो सकती.
मजनू की याद में वह बीमार होने लगी और मौत उसके करीब आ गई. मजनू को जब लैला के इस हालत का पता चला तो वह उससे रहा नहीं गया और वह लैला से मिलने अरब के तपते रेगिस्तानों में गिरता-पड़ता किसी तरह लैला के पास पहुंचा. लेकिन समाज को यह मंजूर नहीं था. जैसे हीं लैला के पास वह पहुंचा लोगों ने उसे पत्थर मारना शुरू कर दिया और उसे भगाने का प्रयास करने लगे.
कहा जाता है कि उन दोनों के प्रेम में इतनी सच्चाई थी कि चोट एक को लगता तो तकलीफ दूसरे को होती. पत्‍थर से जख्‍मी मजनू हो रहा था और लैला दर्द से कराह रही थी. अंत में मजनू से न मिल पाने के गम में लैला की मौत हो गई. कहा जाता है कि लैला की मौत के तुरंत बात ही मजनू ने भी दम तोड़ दिया. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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