- शोध से पता चलता है कि ब्रोकरेज की लक्षित कीमतों पर निर्भर रहना शेयर चुनने के लिए प्रभावी नहीं रहा है, खासकर पिछले एक साल में।
- बीएसई 500 के 445 शेयरों में से 286 (करीब 64%) एक साल पहले की लक्षित कीमत से नीचे कारोबार कर रहे हैं, जो बाजार की बिकवाली और कंपनी-विशिष्ट समस्याओं के कारण हो सकता है।
- लक्षित कीमतें अनुमान हैं और बाजार की अस्थिरता या अप्रत्याशित घटनाओं के कारण सटीक नहीं हो सकतीं।
- अप्रत्याशित रूप से, कुछ शेयर जैसे हिताची एनर्जी इंडिया और डिक्सन टेक्नोलॉजीज अपनी लक्षित कीमत से ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जो बाजार में विविधता दिखाता है।
क्यों लक्षित कीमतें प्रभावी नहीं रहीं?
लक्षित कीमतें विश्लेषकों द्वारा अनुमानित होती हैं, जो कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति पर आधारित होती हैं। लेकिन पिछले एक साल में बाजार में पांच महीने की बिकवाली और कंपनी-विशिष्ट मुद्दों (जैसे इंडसइंड बैंक में विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स में गड़बड़ी) के कारण कई शेयर अपनी लक्षित कीमत से नीचे रहे।
वैकल्पिक रणनीतियाँ
खुदरा निवेशकों को लक्षित कीमतों पर पूरी तरह निर्भर न रहकर मूलभूत विश्लेषण, विविधीकरण, दीर्घकालिक दृष्टिकोण, जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा पर ध्यान देना चाहिए।