HDFC AMC के एमडी नवनीत मुनोट ने इक्विटी और फिक्स्ड इनकम फंड्स में निवेश को फायदेमंद बताया, जबकि गोल्ड और बिटकॉइन को हेजिंग के लिए सीमित रखने की सलाह दी. उन्होंने युवाओं को नियमित और अनुशासित निवेश की सलाह दी और…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- इक्विटी और फिक्स्ड इनकम फंड्स में निवेश फायदेमंद है.
- गोल्ड और बिटकॉइन को हेजिंग के लिए सीमित रखें.
- STP: सही निवेश, लंबा समय, धैर्य.
नई दिल्ली. निवेश को लेकर रणनीति बनाते वक्त सही एसेट क्लास का चुनाव बेहद जरूरी है. HDFC AMC के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोट का मानना है कि इक्विटी और फिक्स्ड इनकम फंड्स में बड़ा निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि ये कैश फ्लो जनरेट करते हैं. इसके मुकाबले गोल्ड और बिटकॉइन जैसी एसेट्स कैश फ्लो नहीं देतीं, इसलिए इन्हें सिर्फ हेजिंग (जोखिम से बचाव) के लिए एक छोटे हिस्से तक सीमित रखना चाहिए.
बिजनेस टुडे से नवनीत मुनोट ने कहा है, सोने की कीमतों में उछाल के पीछे कई बड़े कारण हैं. इसमें सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, फिएट करेंसी को लेकर चिंता, और अमेरिका समेत कई देशों का बढ़ता कर्ज शामिल है. हालांकि, सोने का प्रदर्शन समय-समय पर बेहतर होता है, लेकिन लंबी अवधि में यह अन्य एसेट क्लास की तरह रिटर्न नहीं देता. उन्होंने कहा कि इक्विटी और फिक्स्ड इनकम फंड्स में निवेश से बेहतर ग्रोथ मिलती है, क्योंकि इनके पीछे मजबूत बिजनेस मॉडल और कंपनियों की कमाई होती है.
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युवाओं को कैसी निवेश रणनीति अपनानी चाहिए?
हालिया बाजार गिरावट के बीच नवनीत मुनोट ने युवाओं को सलाह दी कि वे जल्द निवेश करना शुरू करें, इसे नियमित रूप से करें और अनुशासित बने रहें. उन्होंने कहा, “आज के युवा जोखिम लेने को तैयार हैं और वेल्थ क्रिएशन को लेकर गंभीर हैं. वे निवेश के बारे में ज्यादा सीखने और बेहतर फैसले लेने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.”
लॉन्ग टर्म में पैसा बनाने का फॉर्मूला – ‘STP’
मुनोट ने लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन का एक सिंपल फॉर्मूला बताया – ‘STP’, जहां
‘S’ = सही (Sound) निवेश
‘T’ = लंबा समय (Time)
‘P’ = धैर्य (Patience)
उन्होंने कहा, “अगर आप सही जगह निवेश नहीं करेंगे, उसे समय नहीं देंगे और धैर्य नहीं रखेंगे, तो पैसा बनाना मुश्किल होगा.”
बाजार में करेक्शन का क्या मतलब?
मुनोट ने शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर कहा कि शेयर की कीमतें हमेशा किसी कंपनी की वास्तविक कमाई पर आधारित होती हैं. अगर किसी स्टॉक की कीमत उसकी फंडामेंटल वैल्यू से ज्यादा बढ़ जाती है, तो करेक्शन आना तय है.
उन्होंने कहा, “बाजार एक पेंडुलम की तरह काम करता है. अगर कीमतें हकीकत से ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो गिरावट आती ही है. निवेशकों को घबराने के बजाय लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए और सही मौके पर दोबारा निवेश करना चाहिए.” उन्होंने SIP (Systematic Investment Plan) को निवेश का सबसे सरल तरीका बताया, जिससे बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न मिल सकते हैं.