अब बिना सर्जरी ठीक होंगी खाने की नली की दिक्कतें

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खाने की नली की मांसपेशियों के सख्त होने, उनकी चाल बदलने जैसी समस्याओं को अब बिना सर्जरी के दूर किया जा सकेगा। यह संभव होगा पर-ओरल इंडोस्कोपिक मायोटमी (पोयम) तकनीक से। लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के बाद अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भी इस तकनीक से इलाज की शुरुआत हो गई है।

खाने की नली की मांसपेशियों के सख्त होने, उनकी चाल बदलने जैसी समस्याओं को अब बिना सर्जरी के दूर किया जा सकेगा। यह संभव होगा पर-ओरल इंडोस्कोपिक मायोटमी (पोयम) तकनीक से। लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के बाद अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भी इस तकनीक से इलाज की शुरुआत हो गई है। तीन मरीजों पर इसका इस्तेमाल हुआ है। यह तकनीक सस्ती होने के साथ मरीजों को कम तकलीफ देने वाली है। गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने बताया कि इसोफेगस (खाने की नली) की मांसपेशियों के सख्त हो जाने पर उनकी चाल बदल जाती है।

इससे खाने की नली और पेट के बीच में मौजूद वॉल्व भी ठीक से काम नहीं करता है। ऐसे में मरीज खाना खाता है तो वह पेट में अंदर जाने के बजाय ऊपर की ओर निकलने लगता है। मरीज खा नहीं पाता है। उसे लगातार एसिडिटी रहती है। पेट फूलता है और खांसी भी आने लगती है।

इसे एकेलेसिस कार्डिया कहा जाता है। इसे ठीक करने को सर्जरी की जाती है। इसे चिकित्सकीय भाषा में स्फिंटर का डायलटेशन (वैलूनिंग) कहते हैं। इसके कई दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। सर्जरी के बाद करीब 25 से 30 फीसदी मरीजों में यह समस्या दोबारा होने लगती है। लेकिन अब नई तकनीक में यह काफी आसान हो गया है

डॉ. रूंगटा ने बताया कि पोयम तकनीक में मरीज के मुंह के जरिये इंडोस्कोप को खाने की नली से होते हुए म्यूकोसा से सब म्यूकोसा में पहुंचा जाता है। वहां सख्त मांसपेशियों में मामूली चीरा लगाया जाता है। फिर स्फिंटर पर भी चीरा लगाकर रास्ता साफ कर दिया जाता है। इससे खाने की नली की चाल ठीक हो जाती है और स्फिंटर खुलने लगता है। सर्जरी करने पर करीब एक लाख का खर्च आता है। वहीं, पोयम तकनीक से इलाज मेें 40 से 50 हजार रुपये खर्च आता है।


केजीएमयू के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग की लैब में दो दिन पहले पोयम तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया गया। दिल्ली के डॉ. विकास सिंगला ने यहां के चिकित्सकों को पोयम की बारीकियों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. कपिल, डॉ. कमलेंद्र आदि थे।

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